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Friday, March 25, 2011

अपना गुलाम कर लूंगी |

पंखों मैं दम है मैं उडान भर लूंगी ,
इस दुनिया को अब मैं अपने नाम कर लूंगी ,
लाख रोके उस गगन का कोई बाज़ मगर ,
उस बाज़ को भी अपना गुलाम कर दूँगी |

सरहदों का डर तो कभी था ही नहीं मुझको ,
अब तो हर मुल्क को अपने नाम कर लूंगी '
लाख रोके उस गगन का कोई बाज़ मगर ,
उस बाज़ को भी अपना गुलाम कर दूँगी |

घिर आयें कितने घनघोर बादल मगर ,
मैं गगन मैं भी नावों का इंतज़ाम कर लूंगी ,
लाख रोके उस गगन का कोई बाज़ मगर ,
उस बाज़ को भी अपना गुलाम कर दूँगी |

खुद के सपनों को तो पूरा करूंगी मगर ,
औरों के ख्वाबों को भी हकीक़त के नाम कर दूँगी ,
लाख रोके उस गगन का कोई बाज़ मगर ,
उस बाज़ को भी अपना गुलाम कर दूँगी |


3 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर कहा अपने बहुत सी अच्छे लगे आपके विचार
    फुर्सत मिले तो अप्प मेरे ब्लॉग पे भी पधारिये

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  2. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

    ReplyDelete

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