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Friday, April 15, 2011

जिये जा रहे थे



हम  अब भी उन यादों के सहारे जिये जा रहे थे ,
ग़म के पैमाने मुस्कुराते हुए पिए जा रहे थे ,
हमें तो ये गुमा भी न था कि कोई हमें भी याद करेगा ,
हम बेवजह ही अपने दिल को दुखा रहे थे,
हम अब भी उन यादों के सहारे जिये जा रहे थे ,
ग़म के पैमाने मुस्कुराते हुए पिए जा रहे थे |

अब एक पल भी मुस्कुराना मुश्किल हो गया था ,
अश्कों को यूं छिपाना बमुश्किल हो गया था ,
फिर भी न जाने क्यूँ हम यूँ खिलखिला रहे थे ,
हम अब भी उन यादों के सहारे जिये जा रहे थे ,
ग़म के पैमाने मुस्कुराते हुए पिए जा रहे थे |

ग़म का वो एक फ़साना पन्नो में दब गया था ,
कुछ था जो अब कहीं पर सीने में चुभ गया था ,
हम तो उसी दर्द के किनारे सिये जा रहे थे ,
हम अब भी उन यादों के सहारे जिये जा रहे थे ,
ग़म के पैमाने मुस्कुराते हुए पिए जा रहे थे |
 
 
 
 
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