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Wednesday, June 15, 2011

दोस्त फिर याद आएंगे !


 वक्त के साथ दायरे बढ़ते चले गए ,
बचपन के वो दोस्त बिछड़ते चले गए ,
उन यादों से आज भी मन मचल जाता है ,
तस्वीरों को पलटकर देखूं तो आज भी जी ललचाता है ,
इंटरवल में अपने टिफिन से ज्यादा दूसरे का लंच झांकना ,
और टीचर के हर सवाल पर दोस्त का मूंह ताकना ,
हर मुश्किल पर दोस्त ही सहारा लगता था ,
उसका हर जवाब जैसे ईश्वर का इशारा लगता था,
वक्त बेवक्त के झगड़े चन्द मिनट भी नहीं चल पाते थे ,
तिरछी निगाहों से मुस्कुराकर हम दोनों ही फिर एक हो जाते थे ,
हर बार झगड़े के बाद की दोस्ती और मज़बूत हो जाती थी ,
दोनों की ऑंखें ताउम्र दोस्ती की कसम खाती थीं ,
कॉलेज के दिनों मे भी दोस्ती की ये कहानी चलती रही ,
टिफिन से हट अब केन्टीन मे ज़िन्दगी सिमटती रही ,
वक्त बिताता गया और हम बिजी हो गए ,
जो कभी संयुक्त थे अब वो निजी हो गए ,
रोज़ की वो बातें अब चैटिंग में तब्दील हो गयीं ,
अब तो दोस्ती भी नेटवर्क में सील हो गयी ,
महीनो और सालों में अब एक बार मिल पाते हैं ,
हर बार फिर मिलेंगे ये कहकर हम फिर निकल जाते हैं ,
मिलने का ये सिलसिला सिमटता चला गया ,
दोस्तों की लिस्ट से कोई नाम हर बार कटता चला गया ,
अभी तो परिवार है हम शायद उन्हें भूल जायेंगे ,
पर अधेड़ उम्र के सन्नाटे मे वो दोस्त फिर याद आएंगे ,
वो दोस्त फिर याद आएंगे  |||||||   
 

 
  

  
 
 
 

  
 

12 comments:

  1. अब तो दोस्ती भी नेटवर्क में सील हो गयी ,
    सच्चाई को दर्शाती हुई रचना क्या यही हमारी आधुनिकता है या हमारा विकास ?

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  2. रोज़ की वो बातें अब चैटिंग में तब्दील हो गयीं ,
    अब तो दोस्ती भी नेटवर्क में सील हो गयी ,

    kya kahne!

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  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  4. वास्तविकता को जिवंत कर दिया आपने शब्दों में पिरोकर . आभार .

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  5. बहुत सार्थक और भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  6. सच्चे , सटीक शब्दों में
    कही गयी सार्थक रचना ...

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  7. सच्चे , सटीक शब्दों में
    कही गयी सार्थक रचना .

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  8. कृति जी सर्व-प्रथम तो आपको आज ३० जून जन्म-दिवस की हार्दिक मुबारकवाद.आपके उज्जवल एवं समृद्ध भविष्य की हम सदैव कामना करते हैं.आप निरंतर प्रगति के सोपान चढती जाएँ यही हमारी इच्छा है.
    आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद.दरअसल आप ही की इच्छा के मुताबिक यह लेख लिखा था जो रुक गया था,इसे ही अपने जन्म दिन का उपहार समझ लें.

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  9. बहुत सुंदर, सार्थक और भावपूर्ण प्रस्तुति

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  10. बचपन की दोस्‍ती भूलाये नहीं बने.

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  11. bahut badia... bachapan yaad aa gaya...

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  12. bachpan ki bahut si yaaden taja ho gai

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