Total Pageviews

Sunday, August 21, 2011

अब हमारी बारी है !



छिड चुकी है जंग अब कुछ कर दिखायेंगे यहाँ ,          
गंदगी को देश की जड़ से मिटायेगे यहाँ ,
दे चुके जीतना था देना उन शहीदों ने हमें ,
उनके पांव चूमने की अब ये सब तैयारी है ,
कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है | 


वक्त ने मौका दिया है फिर सम्भल जायेंगे अब  ,
जो नहीं कर पाए थे तब वो  दिखायेंगे हम अब ,
कूच कर दी है अभी अब जीतने की बारी  है ,
कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है | 


देश का गौरव बचाना ये  तो अपना फ़र्ज़ है ,                              
अब चूका देंगे ऐ माँ जितना भी हम पर क़र्ज़ है,
एक क्रांति हो चुकी अब दूसरी की बारी है ,
कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है |


ऐ शहीदों माफ करना भूल जो हमसे हुई ,
कर रहे थे भूल जो  खुद पे ही भारी पड़ गयी ,
मान कर तेरी नसीहत सीख ली खुददारी ,
कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है |  




                                                       
वंदे मातरम , वंदे मातरम , वंदे मातरम |

10 comments:

  1. प्रस्तुतीकरण की दृष्टि से आपकी कविता बहुत अच्छी है;लेकिन मुझे नहीं लगता कि लोकपाल विधेयक चाहे वो अन्ना जी का जनलोकपाल हो या सरकारी लोकपाल कोई भी विधेयक भ्रष्टाचार दूर कर सकता है जब तक कि हम भारत के लोग अपनी मानसिकता नहीं बदल लेते।

    सादर

    ReplyDelete
  2. ये बात मैं भी मानती हूँ की जन लोकपाल बिल कोई जादू की छड़ी नहीं है, जो रातों रात सब बदल देगी| पर इस तरह की कोशिश को मिल रहा जन समर्थन कहीं ना कहीं यही तो कह रहा है की देश का आम आदमी इस परिवर्तन का स्वागत करना चाहता है | प्रारंभिक दौर में हर प्रयास बेवजह ही लगता है| पर इसके दूरगामी रिज़ल्ट बाद में सामने आते हैं|1857 की क्रांति के बारे में भी शुरू में लोगों ने यही कहा था , पर उसका असल प्रभाव 15 अगस्त 1947 को देखने को मिला | वक्त लगेगा पर मुझे यकीं है सब कुछ सही हो जायेगा |

    ReplyDelete
  3. आज 23 - 08 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
    ____________________________________

    ReplyDelete
  4. ऐ शहीदों माफ करना भूल जो हमसे हुई ,
    कर रहे थे भूल जो खुद पे ही भारी पड़ गयी ,
    मान कर तेरी नसीहत सीख ली खुददारी ,
    कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है |
    बहुत सुंदर देशप्रेम से ओत - प्रोत शानदार रचना /बदिया प्रस्तुति के लिए बधाई /
    please visit my blog.thanks.
    http://prernaargal.blogspot.com/

    ReplyDelete
  5. चेतना जागृत करती अच्छी प्रस्तुति ... सबको खुद में बदलाव लाना ज़रुरी

    ReplyDelete
  6. जन जागृति करती सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  7. वक्त ने मौका दिया है फिर सम्भल जायेंगे अब ,
    जो नहीं कर पाए थे तब वो दिखायेंगे हम अब ,
    कूच कर दी है अभी अब जीतने की बारी है ,
    कर दिया जितना था करना, अब हमारी बारी है |
    आवाहन करती हुई खूबसूरत रचना |

    ReplyDelete
  8. bahut hi sundar varnan sunder sabdo ke saath

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...